Follow Us:

हिमाचल में पहली बार जलाशयों की मछलियों पर MSP

➤ जलाशयों से प्राप्त मछलियों के लिए पहली बार 100 रुपये प्रति किलो MSP घोषित
➤ मछुआरों को बड़ी राहत, रॉयल्टी 7.5% से घटाकर 1%
➤ 6,000 से अधिक मछुआरों को मिलेगा सीधा लाभ


हिमाचल प्रदेश सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने और मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्य के इतिहास में पहली बार जलाशयों से प्राप्त मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा की है। यह कदम बजट 2026-27 की महत्वपूर्ण घोषणाओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, जलाशयों से पकड़ी गई मछलियों के लिए 100 रुपये प्रति किलोग्राम MSP तय किया गया है। यदि नीलामी में कीमत इससे कम रहती है, तो राज्य सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से प्रति किलो अधिकतम 20 रुपये तक सब्सिडी सीधे मछुआरों के बैंक खातों में भेजेगी। इससे बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से मछुआरों को सुरक्षा मिलेगी।

मछुआरों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने जलाशयों से प्राप्त मछलियों पर रॉयल्टी दर में भारी कटौती की है। पहले यह रॉयल्टी 15 प्रतिशत थी, जिसे घटाकर 7.5 प्रतिशत किया गया था और अब इसे घटाकर मात्र 1 प्रतिशत कर दिया गया है। इस फैसले से प्रदेश के 6,000 से अधिक जलाशय मछुआरों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

हिमाचल में पांच प्रमुख जलाशय हैं—गोबिंद सागर (बिलासपुर-ऊना), पोंग डैम (कांगड़ा), रंजीत सागर, चमेरा (चंबा) और कोल डैम (बिलासपुर)। इन जलाशयों में सिल्वर कार्प, रोहू, कतला, मृगल और ग्रास कार्प जैसी प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं।

सरकार के अनुसार, उन्नत फिंगरलिंग स्टॉकिंग और योजनाबद्ध प्रयासों के कारण जलाशय मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022-23 में 549.35 मीट्रिक टन उत्पादन था, जो बढ़कर 2025-26 में 818.02 मीट्रिक टन हो गया है। वहीं राज्य का कुल मछली उत्पादन भी 19,019 मीट्रिक टन से बढ़कर 20,005 मीट्रिक टन पहुंच गया है।

सरकार का मानना है कि यह नीति न केवल मछुआरों की आजीविका को मजबूती देगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सतत मत्स्य विकास को भी नई गति देगी।